उत्तराखंड में फिर कहर बनकर टूटा बादलों का कहर, कई जिलों में भारी तबाही
उत्तराखंड एक बार फिर प्राकृतिक आपदा की मार से कराह उठा है। पहाड़ों पर बरसी आफत ने कई लोगों के आशियाने उजाड़ दिए हैं, तो कहीं सपने मलबे में दब गए हैं। बीते गुरुवार रात से लगातार हो रही भारी बारिश के बीच शुक्रवार को राज्य के कई हिस्सों में बादल फटने की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे भारी जान-माल का नुकसान हुआ है।
चमोली: देवाल में तबाही, पति-पत्नी लापता
चमोली जिले के देवाल ब्लॉक के मोपाटा गांव में गुरुवार रात बादल फटने की घटना हुई, जिससे भारी तबाही मची। जिलाधिकारी संदीप तिवारी के अनुसार, गांव निवासी तारा सिंह और उनकी पत्नी लापता हैं। वहीं विक्रम सिंह और उनकी पत्नी घायल हुए हैं। दोनों के घर और गोशाला मलबे में दब गई है, जिसमें करीब 15 से 20 मवेशियों के दबे होने की आशंका है।
हालात की गंभीरता को देखते हुए चमोली जिले के सभी ब्लॉकों में शुक्रवार को स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया गया है। प्रशासन की टीम राहत एवं बचाव कार्य में जुटी है, लेकिन लगातार बारिश के कारण सड़कों के क्षतिग्रस्त होने से राहत कार्यों में बाधा आ रही है।
टिहरी: भिलंगना ब्लॉक में भी फटा बादल
टिहरी जिले के भिलंगना ब्लॉक के गेंवाली गांव में भी गुरुवार रात बादल फटा। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी बृजेश भट्ट के अनुसार, बादल फटने से कृषि भूमि, पेयजल और विद्युत लाइनें क्षतिग्रस्त हुई हैं। राजस्व विभाग की टीम प्रभावित क्षेत्र के लिए रवाना हो गई है। कई जगह पैदल पुल और रास्ते भी बह गए हैं।
रुद्रप्रयाग: जखोली ब्लॉक में भारी बारिश से नुकसान
रुद्रप्रयाग जिले के जखोली ब्लॉक के छेनागाड़ और बांगर समेत कई इलाकों में तेज बारिश और बादल फटने से व्यापक नुकसान हुआ है। कई घरों और सड़कों को नुकसान पहुंचा है।
कर्णप्रयाग: कालेश्वर में घरों में घुसा मलबा
कर्णप्रयाग में मूसलाधार बारिश से कालेश्वर क्षेत्र में पहाड़ी से भारी मलबा नीचे आया, जो घरों में घुस गया। प्रशासन की ओर से जेसीबी मशीनों की मदद से मलबा हटाने का कार्य जारी है। अलकनंदा और पिंडर नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। सुभाषनगर में पहाड़ी से गिरे बोल्डर और मलबे के कारण सड़क मार्ग अवरुद्ध हो गया है।
हालात चिंताजनक, प्रशासन अलर्ट पर
देवाल, थराली, कर्णप्रयाग, आदिबदरी समेत कई क्षेत्रों में भारी बारिश से लोग डरे हुए हैं। लगातार वर्षा और पहाड़ी क्षेत्रों से आ रहा मलबा जनजीवन को प्रभावित कर रहा है। जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमें मौके पर राहत और बचाव कार्यों में जुटी हुई हैं, लेकिन बिगड़ते मौसम के कारण चुनौतियां बढ़ गई हैं। राज्य में एक बार फिर बादलों का कहर यह दर्शाता है कि उत्तराखंड को सतर्क और मजबूत आपदा प्रबंधन प्रणाली की कितनी आवश्यकता है। पहाड़ों में हर बारिश एक नई चिंता और खतरे की घंटी बनकर आती है।
