कोन घोल रहा है क्षेत्रवाद का जहर,मंडी परिषद ने आंकड़े जारी कर किया आरोपों का खंडन
देहरादून। उत्तराखंड में डबल इंजन की सरकार में तेजी से विकास कार्य आगे बढ़ रहे है,2014 से ही जब से केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनी है,तब से ही उत्तराखंड के दूरस्थ क्षेत्रों में विकास हो रहा है,खासकर सड़को की स्थिति की बात की जाए तो उत्तराखंड में सड़कों की स्थिति डबल इंजन की सरकार आने के बाद सुधरी है,उत्तराखंड में ऑल वेदर रोड़ से जहाँ चारों धामों तक पहुंचना आसान हो गया है,वहीं गढ़वाल के साथ कुमाऊँ की भी सड़की ऑल वेदर रोड़ बनने से बेहतर हुई है,केंद्र की मोदी सरकार हो प्रदेश की धामी सरकार डबल इंजन की सरकार में सड़कों की स्थिति और सुधार हुआ है,दिल्ली से देहरादून अब महज ढाई घण्टे में पहुंचा जा रहा है,तो चार धाम की यात्रा करने के लिए भी अब सड़क बेहतर होने से समय की बचत हो रही है,लेकिन सड़कों का यही विकास दिल्ली में बैठे एक पत्रकार को अच्छा नहीं लग रहा है,इसलिए उन्होंने उत्तराखंड मंडी परिषद द्वारा बनने वाली सड़को को लेकर सवाल उठाएं है,वो भी क्षेत्रवाद को जोड़कर,दिल्ली में बैठे पत्रकार ने अपने चैनल में नहीं बल्कि शोसल मीडिया पर मंडी परिषद पर क्षेत्रवाद के आरोप लगाए है कि परिषद के द्वारा कुमाऊँ में ज्यादा सड़के बनाई गई हैं,क्योंकि मंडी परिषद का मुख्यालय रुद्रपुर में है। उनके इन आरोपों पर शोसल मीडिया पर ही कई लोगो ने उन्हें कमेंट के जरिए घेरने की भी कोशिश की और लिखा है सड़को का विकास पूरे उत्तराखंड में हो रहा है,जबकि ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेलवे लाईन का भी निर्माण गढ़वाल में ही हो रहा है न कि कुमाऊँ में।

मंडी अध्यक्ष अनिल कपूर डब्बू ने रखा तर्क
मंडी परिषद के अध्यक्ष अनिल कपूर डब्बू का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सर्वांगीण विकास की भावना पर काम करते हैं,और उन्ही के मूल मंत्र को आगे बढाने का काम वह कर रहे हैं,जो आरोप एक पत्रकार के द्वारा लगाएं जा रहे हैं उनको वह स्पष्ट कर दें कि क्षेत्रवाद के आधार पर प्रदेश कभी नहीं चल सकता है, मंडी परिषद की जो आय होती है उसी के आधार पर मंडी परिषद खर्च करता है,उनके द्वारा मंडी परिषद की आय को बढ़ाने का निरंतर प्रयास किया जा रहा है जिसको लेकर 171 करोड़ का लक्ष्य भी इस वर्ष रखा गया है जिसमें 137 करोड़ की आए अभी तक मंडी परिषद की हो गई है,मंडी परिषद की आय बढ़ रही है,इसलिए विकास के काम भी तेजी से हो रहे हैं फिर चाहे वह मंडियों में हो या फिर सड़कों के विकास को लेकर हो,किसानों को बेहतर सड़के फसल लाने के लिए मिले इसलिए सड़कों का भी निर्माण किया जाता है। पहली बात वह यह भी स्पष्ठ करना चाहते है कि जिन मंडियों की आय बेहतर होती है,उसी आय से उनके आसपास क्षेत्र में काम किए जाते हैं,वर्तमान में अगर बात करें तो कुमाऊँ की मंडियों से 87 करोड़ से अधिक की आय अभी हो चुकी है,जबकि गढ़वाल से 44 करोड़ से अधिक की आय हो चुकी है,उसी आधार पर भी विकास के काम कराएं जा रहें है,जो लोग यह सवाल उठा रहें है,उन्हें यही भी पता होना चाहिए कि मंडी परिषद का मुख्यायल भले ही रुद्रपुर में हो लेकिन मंडी परिषद के ज्यादातर अध्यक्ष गढ़वाल से ही बने है,फिर यह आरोप क्यों लगाएं जा रहें है। जब अध्यक्ष प्रदेश से बनता है तो फिर काम भी प्रदेश हित और किसानों के लिए होते हैं।
पूर्व मंडी अध्यक्ष जोत सिंह बिष्ट का बयान
लेकिन एक पत्रकार के द्वारा उठाए गए सवाल का जवाब जब हमने हरीश रावत सरकार में मंडी परिषद की जिम्मेदारी उठाने वाले जोत बिष्ट से पूछे तो उन्होंने ने सिरे से इन आरोपों का खारिज कर दिया है,कि मंडी परिषद किसी क्षेत्रवाद से प्रभावित होकर सड़कों का निर्माण नहीं करती,बल्कि मंडी परिषद के पास जो प्रस्ताव आते हैं उनके आधार पर सड़कों का निर्माण करती है,पहली शर्त तो यही है कि किसानों की फसल खेत से सड़कों तक आसानी पहुंचाया जाए उन्हें सड़कों का निर्माण मंडी परिषद के द्वारा किया जाता है। जिन सड़कों की प्रस्ताव मंडी परिषद के समक्ष आते हैं उन्हें मंडी परिषद की बैठक में बाकायदा जो भी मेंबर परिषद के होते हैं उनके समक्ष रखा जाता है और जिन सड़कों के निर्माण को मंजूरी देनी होती है उनका निरीक्षण इंजीनियर करते हैं। जहाँ तक कुमाऊँ की बात है तो रुद्रपुर में मंडी परिषद का मुख्यालय है इसलिए कुमाऊँ के किसानों के ज्यादा प्रस्ताव आ सकते हैं,क्योंकि उनके लिए मंडी परिषद का मुख्यालय नजदीक है।
