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गीता श्लोक पढ़ाने के फैसले पर कांग्रेस का ऐतराज, कहा– सभी धर्मों की शिक्षाएं शामिल होनी चाहिए


उत्तराखंड सरकार के स्कूलों में प्रार्थना के दौरान श्रीमद्भागवत गीता के श्लोक पढ़ाने के निर्णय पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करण माहरा ने इस फैसले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि पहले विद्यालयों में ‘मोरल साइंस’ की पढ़ाई होती थी, जिससे बच्चों को नैतिक मूल्यों और जीवन जीने की सीख मिलती थी, लेकिन अब वह बंद हो चुकी है।

करण माहरा ने कहा कि सरकार का फैसला स्वागत योग्य होता अगर यह केवल गीता तक सीमित न रहकर सभी धर्मों की पुस्तकों से अच्छी बातें लेकर लागू किया जाता। उन्होंने कहा कि भारत बहुधार्मिक और विविधताओं से भरा देश है, ऐसे में किसी एक धर्मग्रंथ को विद्यालयों में थोपना उचित नहीं है।

उन्होंने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि वर्तमान सरकार केवल वोट बैंक की राजनीति कर रही है और धार्मिक एजेंडे जैसे “लव जिहाद” या “थूक जिहाद” जैसे मुद्दों को हवा देकर समाज को बांटने का काम कर रही है। माहरा ने सुझाव दिया कि अगर सरकार वास्तव में बच्चों को नैतिक शिक्षा देना चाहती है तो सभी धर्मों के ग्रंथों में से सकारात्मक और शिक्षाप्रद बातें शामिल करनी चाहिए।

करण माहरा ने दोहराया कि कांग्रेस किसी भी अच्छी पहल के खिलाफ नहीं है, लेकिन उसे देश की धर्मनिरपेक्ष संस्कृति और संविधान के अनुरूप होना चाहिए। सभी धर्मों की समान भागीदारी ही भारत की असली पहचान है, और शिक्षा व्यवस्था में भी यही दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए।



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