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ग्लोबल इन्वेस्टर समिट पर उठे सवालों का उद्योग सचिव ने दिया जवाब, बोले—1.01 लाख करोड़ के निवेश की ग्राउंडिंग


देहरादून। उत्तराखंड ग्लोबल इन्वेस्टर समिट-2023 के तहत हुए निवेश समझौतों और उनके धरातल पर उतरने को लेकर सोशल मीडिया पर उठ रहे सवालों के बीच सचिव उद्योग एवं सचिव मुख्यमंत्री विनय शंकर पांडे ने सरकार का पक्ष रखा है। उन्होंने कहा कि राज्य में अब तक एक लाख एक हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की ग्राउंडिंग हो चुकी है। निवेश से संबंधित आंकड़े सार्वजनिक हैं और परियोजनाओं का विवरण उद्योग विभाग, यूके स्पाइस तथा सिंगल विंडो सिस्टम के पोर्टल पर उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि तथ्यों की पूरी जानकारी के बिना निवेश को लेकर भ्रामक धारणा बनाना उचित नहीं है।

विनय शंकर पांडे ने बताया कि दिसंबर 2023 में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर समिट के दौरान करीब 3.56 लाख करोड़ रुपये के निवेश समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए थे। इन प्रस्तावों को धरातल पर उतारने के लिए अब तक तीन ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी आयोजित की जा चुकी हैं। उन्होंने कहा कि करीब 24 हजार करोड़ रुपये के निवेश की अगली ग्राउंडिंग की तैयारी चल रही है और जल्द ही चौथी ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी आयोजित की जाएगी।

### निवेश के आंकड़े सार्वजनिक, पोर्टल पर उपलब्ध है पूरा विवरण

सचिव उद्योग ने कहा कि निवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए परियोजनाओं, संबंधित विभागों और उनके स्थान का विवरण सरकारी पोर्टलों पर उपलब्ध कराया गया है। निवेशकों को परियोजनाएं स्थापित करने में आने वाली समस्याओं के समाधान के लिए निवेश मित्रों की व्यवस्था भी की गई है। उन्होंने कहा कि निवेश की स्थिति को लेकर पहले भी सवाल उठाए गए थे, जिनका तथ्यों के साथ जवाब दिया गया। सरकार ने सदन में भी समय-समय पर निवेश की प्रगति की जानकारी दी है।

### छोटे निवेश भी रोजगार सृजन में अहम

स्थानीय कारोबारियों और छोटे उद्यमों के निवेश पर उठाए जा रहे सवालों पर पांडे ने कहा कि निवेश का महत्व केवल उसकी राशि से नहीं, बल्कि उससे पैदा होने वाले रोजगार और आजीविका के अवसरों से भी तय होता है। यदि कोई व्यक्ति अपनी मेहनत की कमाई से 10 हजार रुपये लगाकर आटा चक्की, मोबाइल की दुकान या कोई अन्य छोटा कारोबार शुरू करता है और उससे दो लोगों को रोजगार मिलता है, तो यह भी राज्य की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान है।

उन्होंने कहा कि छोटे कारोबारियों के निवेश को कमतर आंकना उनके परिश्रम और आत्मनिर्भर बनने की भावना का अपमान है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का स्पष्ट निर्देश है कि राज्य में बड़े उद्यमियों के साथ छोटे व्यवसायियों को भी समान सम्मान दिया जाए। स्थानीय उद्यमियों को प्रोत्साहित करना और उनके लिए अनुकूल माहौल तैयार करना सरकार की प्राथमिकता है।

### पर्वतीय परिस्थितियों के अनुरूप बनाई गई औद्योगिक नीति

पांडे ने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां दूसरे राज्यों से अलग हैं। प्रदेश का करीब 70 प्रतिशत क्षेत्र वनाच्छादित है, जबकि बड़े उद्योगों की स्थापना की संभावनाएं मुख्य रूप से देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और नैनीताल के कुछ हिस्सों में अधिक हैं। ऐसे में राज्य की औद्योगिक नीतियां पारिस्थितिकी और अर्थव्यवस्था के बीच संतुलन बनाए रखने के साथ रोजगार के अवसर बढ़ाने के उद्देश्य से तैयार की गई हैं।

उन्होंने बताया कि ग्लोबल इन्वेस्टर समिट के लिए विदेशों के अलावा देश के प्रमुख महानगरों में रोड शो आयोजित किए गए थे। गढ़वाल और कुमाऊं मंडलों सहित सभी जिलों में निवेश सम्मेलनों के माध्यम से स्थानीय उद्यमियों और छोटे कारोबारियों को भी आमंत्रित किया गया। सरकार का उद्देश्य बड़े औद्योगिक निवेश के साथ-साथ स्थानीय उद्योगों और स्वरोजगार को भी बढ़ावा देना है।

सचिव उद्योग ने मीडिया और संबंधित लोगों से अपील की कि वे निवेश परियोजनाओं का मौके पर निरीक्षण करें, उद्यमियों से बातचीत करें और धरातल पर हुए काम का आकलन तथ्यों के आधार पर करें। उन्होंने कहा कि राज्य में निवेश बढ़ाना, निवेशकों को सहयोग देना और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करना सरकार की प्राथमिकता है।



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