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फिल्म टूरिज्म कॉन्क्लेव-साउथ में छाया उत्तराखंड, दक्षिण के फिल्म निर्माताओं ने दिखाई शूटिंग में दिलचस्पी


हैदराबाद। उत्तराखंड की प्राकृतिक खूबसूरती और अनुकूल फिल्म नीति ने दक्षिण भारतीय फिल्म उद्योग का ध्यान अपनी ओर खींचा है। गुरुवार को हैदराबाद में आयोजित ‘इंडिया इंटरनेशनल फिल्म टूरिज्म कॉन्क्लेव-साउथ’ में उत्तराखंड की फिल्म नीति और शूटिंग लोकेशन को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया। कॉन्क्लेव में दक्षिण के फिल्म निर्माता और निर्देशक उत्तराखंड की फिल्म नीति से प्रभावित नजर आए और कई प्रोडक्शन हाउस ने प्रदेश में फिल्मांकन को लेकर रुचि दिखाई।

चेन्नई के बाद हैदराबाद में आयोजित इस आयोजन में भी उत्तराखंड फिल्म नीति की व्यापक सराहना हुई। कॉन्क्लेव में विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों के साथ ट्यूनीशिया, इटली, थाईलैंड, रोमानिया, हंगरी, सर्बिया और अजरबैजान के प्रतिनिधियों ने भी प्रतिभाग किया।

आयोजन में प्रसार भारती वेव्स ओटीटी, उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद और महाराष्ट्र सीडीसी समेत विभिन्न एग्जिबिटर्स ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम की शुरुआत नेटवर्किंग सेशन से हुई, जिसके बाद एग्जिबिटर्स ने वीडियो प्रेजेंटेशन के माध्यम से अपने-अपने राज्यों और फिल्म शूटिंग से जुड़ी सुविधाओं की जानकारी दी। इसके बाद फिल्म निर्माताओं और प्रतिनिधियों के बीच आपसी विचार-विमर्श और बैठकें हुईं।

कई प्रोडक्शन हाउस ने दिखाई दिलचस्पी

कॉन्क्लेव के दौरान हैदराबाद के कई प्रमुख प्रोडक्शन हाउस के निर्माता और निर्देशक मौजूद रहे। उत्तराखंड में शूटिंग की संभावनाओं को लेकर वेथायोग पिक्चर्स, फ्रैम्स क्राफ्ट, पीपल मीडिया फैक्ट्री, बरकत स्टूडियो, पिक्सेल्स एंड स्ट्रिंग, पीएलआईएल प्रोडक्शंस, दिल राजू प्रोडक्शंस, टीसीए, प्राइमशो एंटरटेनमेंट, जीआरके एंटरटेनमेंट, वार्फ स्ट्रीट स्टूडियो, मैत्री मूवी मेकर्स, ओमेगा क्रिएशन्स और स्टार ऑर्बिट स्टूडियोज़ सहित कई प्रोडक्शन हाउस ने रुचि दिखाई।

वहीं, रामोजी फिल्म सिटी हैदराबाद के प्रतिनिधियों ने भी उत्तराखंड में फिल्मांकन को लेकर दिलचस्पी व्यक्त की। ऐसे में माना जा रहा है कि इस कॉन्क्लेव के जरिए उत्तराखंड में दक्षिण भारतीय फिल्मों की शूटिंग और फिल्म पर्यटन को बढ़ावा मिलने की नई संभावनाएं बनी हैं।

फिल्म नीति की खूबियां बताईं

कॉन्क्लेव में उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद के नोडल अधिकारी के.एस. चौहान ने किया। उन्होंने फिल्म निर्माताओं को उत्तराखंड की प्राकृतिक लोकेशन, फिल्म नीति, शूटिंग के लिए उपलब्ध सुविधाओं और सरकार की ओर से दी जा रही सहायता की विस्तार से जानकारी दी।

उन्होंने सिंगल विंडो क्लीयरेंस व्यवस्था के साथ ही प्रदेश में फिल्मांकन की संभावनाओं और शूटिंग के लिए उपलब्ध सुविधाओं के बारे में भी बताया। चौहान ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में उत्तराखंड को देश का प्रमुख फिल्म शूटिंग डेस्टिनेशन बनाने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है।

हिंदी और क्षेत्रीय फिल्मों को 3 करोड़ तक सब्सिडी

नोडल अधिकारी के.एस. चौहान ने बताया कि उत्तराखंड में फिल्म शूटिंग को प्रोत्साहित करने के लिए लागू फिल्म नीति के तहत फिल्म निर्माताओं को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। उत्तराखंड में फिल्माई गई हिंदी और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्मों को 3 करोड़ रुपये तक की सब्सिडी प्रदान की जा रही है। इसके अलावा वेब सीरीज और विदेशी फिल्मों को भी सब्सिडी के दायरे में शामिल किया गया है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की खूबसूरत प्राकृतिक लोकेशन, अनुकूल फिल्म नीति और शूटिंग से जुड़ी सुविधाओं को दक्षिण भारतीय फिल्म उद्योग के सामने प्रस्तुत करने का उद्देश्य प्रदेश में अधिक से अधिक फिल्म निर्माताओं को आकर्षित करना है। इससे आने वाले समय में राज्य में फिल्म शूटिंग के साथ-साथ फिल्म पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

सरकार की ओर से उत्तराखंड को फिल्म डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने के प्रयासों के बीच हैदराबाद कॉन्क्लेव में मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया को प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।



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